प्रत्यक्ष कर संहिता २०१२ से लागू होगी
नई दिल्ली। सरकार ने मौजूदा आयकर कानून की जगह नयी प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) में आयकर मंसूबों को सीमित करते हुए, उन्हें हकीकत की जमीन पर ला दिया है और इसे लागू करने का कार्यक्रम भी एक साल आगे ब़ढाकर अप्रैल २०१२ तक टाल दिया है।
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा आज लोकसभा में पेश बहुप्रतीक्षित डीटीसी विधेयक में शामिल प्रस्तावों को पहले मसौदे की तुलना में सीमित रखते हुए कर मुक्त आय की सीमा १६ लाख रुपये से ब़ढाकर दो लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया है। बुजुगों की ढाई लाख रुपये तक सालाना आय कर मुक्त होगी, लेकिन महिलाआें के लिए करमुक्त आय का अलग से कोई प्रावधान इसमें नहीं है। वर्तमान आयकर अधिनियम १९६१ का स्थान लेने वाले डीटीसी में दो से पांच लाख रुपये की आय पर १० प्रतिशत, पांच से दस लाख रुपये पर २० प्रतिशत और दस लाख रुपये से अधिक की सालाना आय पर ३० प्रतिशत की दर से आयकर लगाने का प्रस्ताव है। बुजुर्गों के लिए ढाई लाख से पांच लाख की आय पर १० प्रतिशत कर का प्रस्ताव किया गया है। कार्पोरेट आय पर कर की दर ३० प्रतिशत के वर्तमान स्तर पर बनाये रखने का प्रस्ताव है, पर उसे कर, उपकर और अधिभारों से मुक्त रखा गया है। उद्योग जगत ने प्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार के कदम का स्वागत किया है, पर उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष राजन भारती मित्तल ने कहा, ‘जो उम्मीदें थी, उतना नहीं हुआ।’ विधेयक में सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट बचत एवं निवेश योजनाआें में निवेश पर छूट की सीमा ब़ढा दी गयी है। व्यक्तिगत करदाता नये कानून के तहत १५ लाख की बचत और निवेश पर कर कटौती हासिल कर सकेंगे।